गाने का लाखों रुपये फीस लेने वाली मैथिली ठाकुर क्या बेहतर जनप्रतिनिधि बन पाएंगी?

पटना। मशहूर लोक और भक्ति गायिका मैथिली ठाकुर ने बीजेपी की सदस्यता ले ली है और अब वह पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही हैं। लेकिन उनके इस कदम का स्वागत से ज्यादा विरोध हो रहा है। और यह विरोध समाज में ही नहीं बल्कि उस पार्टी के भीतर से भी आ रहा है जिसकी वह सदस्य बनी हैं। इसके अलावा पैसे को लेकर उनका मोह भी मुद्दा बनता दिख रहा है। लिहाजा अपने-अपने तरीके से कई लोगों के वह निशाने पर हैं।

उन्होंने मंगलवार को चाणक्य होटल पटना में राज्य के वरिष्ठ बीजेपी नेताओं की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ली। इसके बाद बिहार बीजेपी के अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने कहा कि “पूरी दुनिया मिथिला की बेटी लोक गायिका मैथिली ठाकुर को सलाम करती है। बिहार एनडीए सरकार में आगे बढ़ेगा और विकसित होगा। महिलाओं का सशक्तीकरण, गरीब का कल्याण, युवाओं का भविष्य, किसानों का कल्याण हमारी सरकार की प्राथमिकता है। इसी प्राथमिकता के साथ हम चुनाव में मतदाता के पास जाने वाले हैं।”

मैथिली ठाकुर ने पार्टी में शामिल होने के बाद कहा कि, “वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रभावित हैं और नीतीश कुमार से प्रेरित होकर उनके सहयोग के लिए खड़ी हैं। राजनीतिक दल में शामिल होने का मतलब यह नहीं है कि मैं नेता बनने आई हूं। मैं समाज सेवा के लिए आई हूं। मैं मिथिला की बेटी हूं और मेरे प्राण मिथिलांचल में बसते हैं।”

मैथिली ठाकुर ने चुनाव लड़ने के सवाल पर कहा कि, “वो सिर्फ़ पार्टी का सहयोग करने के लिए आई हैं और पार्टी जैसा आदेश देगी वो उसे मानेंगी। मेरा उद्देश्य चुनाव लड़ना नहीं है। पार्टी मुझे जो आदेश देगी, उसका मैं पालन करूंगी।”

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, उन्हें दरभंगा की अलीनगर सीट से बिहार विधानसभा चुनाव लड़ाया जा सकता है. ऐसे में अलीनगर सीट से मौजूदा विधायक मिश्रीलाल यादव का टिकट कटना लगभग तय है। अगर मैथिली ठाकुर को टिकट मिलता है, तो यह पहली बार होगा जब बिहार की लोक-संस्कृति से जुड़ी कोई प्रसिद्ध गायिका सीधे राजनीतिक मैदान में उतरेगी।

वरिष्ठ पत्रकार नरेंद्र नाथ मिश्रा लिखते हैं कि, “मैथिली ठाकुर बीजेपी में शामिल हो गईं। अलीनगर से टिकट भी मिलेगा। उम्मीद करते हैं इनके पिता मैथिली को स्वतंत्र होकर राजनीति करने देंगे। लोगों से नहीं कहेंगे कि-“मेरी बेटी घर से बाहर पैर रखने का एक लाख लेती है”। जनप्रतिनिधि बनना जिम्मेदारी का काम होता है”

गांव वाले के बुलाने पर नहीं आईं मैथिली ठाकुर

एक बार इनके गांव वालों ने छठ पूजा में प्रोग्राम कराने के लिए इनको बुलाना चाहा तो इन्होंने 5 लाख रुपए अपनी फीस बताई। गांव वाले 2 लाख तक दे रहे थे फिर भी इन्होंने आने से मना कर दिया। सोशल मीडिया पर उनके क्षेत्र के लोगों के द्वारा कही गई यह बात वायरल हो रही है। 

बिहार के चाणक्य होटल, जहां भाजपा का प्रेस कॉन्फ्रेंस सेंटर है। वहीं बाहर भाजपा के सदस्य निरंजन बताते हैं कि,”आज ही बीजेपी में शामिल हुईं मैथिली ठाकुर, विधानसभा चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी में हैं, हैरान करने वाली बात यह है टिकट को लेकर इनका नाम भी खूब चर्चाओं में है , मैथिली ठाकुर का ना ही पार्टी में कोई योगदान है, ना ही समाज में कोई योगदान है। वह सोशल मीडिया पर वायरल बस। अगर भाजपा मैथिली ठाकुर को टिकट देती है तो यह भाजपा कार्यकर्ताओं की एवं पार्टी में संघर्ष करने वाले नेताओं की बहुत बड़ी हार होगी।”

मिथिला क्षेत्र के रहने वाले मानस झा बताते हैं कि, “जो दल इन्हें उम्मीदवार बनाना चाहता है वह सिर्फ अपनी जीत के लिए ऐसा कर रहा है। मैथिली अगर खुदा न खास्ता विजयी नहीं हुईं तो भविष्य क्या होगा? अगर जीत भी गईं तो उनके सांगीतिक जीवन का क्या होगा? बेहतर होता कि एक कलाकार के रूप में पहचान बनाने वाली मैथिली ठाकुर को कला के क्षेत्र में विशेष पहचान के लिये राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा या राज्यपाल द्वारा विधान परिषद भेजा जाता। राजनीतिक रूप से अपरिपक्व मैथिली शायद अभी नहीं समझ पा रही हैं कि वह क्या पाकर क्या खो रही हैं।”

सोशल मीडिया पर विजय अक्षित की लेखनी को लोग काफी पसंद करते हैं। वह बताते हैं कि,”लोक गायिका मैथिली ठाकुर किसी भी विधायक, मंत्री से ऊपर का सम्मान रखती थीं। देश के दो बड़े उद्योगपति मुकेश अंबानी और वेदांता के मालिक अनिल अग्रवाल के यहां उनके घर में भजन परफॉर्म की थीं और पूरा परिवार सब बैठ कर हाथ जोड़ कर सुन रहा था। ये सम्मान हर कोई गायक नहीं कमा पाता है। राजनीति का कीड़ा बहुत गंदा होता है। जिसे काट ले वो खत्म हो जाता है। हो सकता है मैथिली ठाकुर जीत जाएं, विधायक बन जाएं, मंत्री भी बन जाएं, लेकिन जो मान सम्मान उनका लोक गायक के रूप में था वो कभी नहीं रह पाएगा।”

“उसके बाप को देख रहा हूं कि कैसा राजनीति का कीड़ा है उसके अंदर। कह रहा है कि बिहार बदलेंगे। वाह रे बेशर्म। आंख के सामने ही बेटी का जीवन बर्बाद कर रहा। अंदर का जात पात हावी ऐसा है कि फूट फूट कर बाहर आ रहा। खैर बाकी का तो नहीं पता, लेकिन मैं एक टैलेंट को बर्बाद होते देख दुखी हूं। अक्षय कुमार, परेश रावल, अनुपम खेर, पीयूष मिश्रा, विक्रांत मैसी, ऐसे कई एक्टर हैं जो राजनीतिक होते ही बर्बाद ही हो गए। न इधर के रहे, न उधर के। कलाकार अगर राजनीतिक हो जाए तो वो सिर्फ उस विशेष पार्टी का कलाकार हो जाता है, न कि फिर वो जनता का कलाकार रहता है।” आगे वह कहते हैं।

मिथिला के लोग भी खुले तौर पर कह रहे हैं कि मैथिली ठाकुर अच्छी गायिका हैं लेकिन राजनीति में जनता को वो नायिका अच्छी लगती है जो निस्वार्थ लोगों की सेवा करे न कि घर से एक कदम निकलने के लिए भी पैसा ले…..फैसला बिहार की जनता को लेना है।

(पटना से राहुल कुमार की रिपोर्ट।)

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